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mahabharat 3.308.9: मैं तुम्हें वे शब्द सुनाता हूँ जो कुन्ती ने उस समय अश्वनदी के जल में उस पिटारे को विसर्जित करते समय रोते हुए कहे थे। उन्हें सुनो।   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.308.9 
समुत्सृजन्ती मञ्जूषामश्वनद्यां तदा जले।
उवाच रुदती कुन्ती यानि वाक्यानि तच्छृणु॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें वे शब्द सुनाता हूँ जो कुन्ती ने उस समय अश्वनदी के जल में उस पिटारे को विसर्जित करते समय रोते हुए कहे थे। उन्हें सुनो।
 
I shall tell you the words that Kunti said while weeping at that time while immersing that box in the waters of the Ashvanadi. Listen to them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)