Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.308.8: यद्यपि वह जानती थी कि कन्या का गर्भ धारण करना सर्वथा वर्जित और अनुचित है, फिर भी पुत्र के प्रति उमड़ते प्रेम के कारण कुंती करुण स्वर में रोने लगी। | mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि वह जानती थी कि कन्या का गर्भ धारण करना सर्वथा वर्जित और अनुचित है, फिर भी पुत्र के प्रति उमड़ते प्रेम के कारण कुंती करुण स्वर में रोने लगी।
Although she knew that it is completely forbidden and improper for a girl to conceive, yet Kunti began to weep pitifully due to the overflowing love for her son.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥