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mahabharat 3.308.6-7: बालक के जन्म लेते ही बहन कुन्ती ने धाय से परामर्श करके एक सन्दूक मँगवाया और उसमें चारों ओर सुन्दर मुलायम बिछौना बिछा दिया। इसके बाद सन्दूक के चारों ओर मोम लगा दिया, जिससे उसमें जल न जा सके। जब वह सब प्रकार से चिकना और सुखदायक हो गया, तब उसने बालक को उसके अन्दर सुला दिया और उसका सुन्दर ढक्कन बंद कर दिया और रोते हुए सन्दूक को अश्वनादि में छोड़ दिया।*॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.308.6-7 
जातमात्रं च तं गर्भं धात्र्या सम्मन्त्र्य भाविनी।
मञ्जूषायां समाधाय स्वास्तीर्णायां समन्तत:॥ ६॥
मधूच्छिष्टस्थितायां सा सुखायां रुदती तथा।
श्लक्ष्णायां सुपिधानायामश्वनद्यामवासृजत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
बालक के जन्म लेते ही बहन कुन्ती ने धाय से परामर्श करके एक सन्दूक मँगवाया और उसमें चारों ओर सुन्दर मुलायम बिछौना बिछा दिया। इसके बाद सन्दूक के चारों ओर मोम लगा दिया, जिससे उसमें जल न जा सके। जब वह सब प्रकार से चिकना और सुखदायक हो गया, तब उसने बालक को उसके अन्दर सुला दिया और उसका सुन्दर ढक्कन बंद कर दिया और रोते हुए सन्दूक को अश्वनादि में छोड़ दिया।*॥6-7॥
 
As soon as the child was born, sister Kunti, after consulting the nurse, called for a box and spread beautiful soft bedding all around in it. After this, she smeared wax all around the box, so that water could not enter it. When it became smooth and pleasant in all respects, she put the child to sleep inside it and closed its beautiful lid and while crying, left the box in the Ashvanadi*॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)