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mahabharat 3.308.4: तदनन्तर उचित समय पर भगवान सूर्य की कृपा से सुन्दरी पृथा ने स्वयं कन्या ही रहकर देवताओं के समान तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.308.4 
तत: कालेन सा गर्भं सुषुवे वरवर्णिनी।
कन्यैव तस्य देवस्य प्रसादादमरप्रभम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर उचित समय पर भगवान सूर्य की कृपा से सुन्दरी पृथा ने स्वयं कन्या ही रहकर देवताओं के समान तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया॥4॥
 
Thereafter, at the right time, by the grace of Lord Surya, the beautiful Pritha herself remained a girl and gave birth to a son as bright as the gods. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)