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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.308.24 
विसर्जयित्वा मञ्जूषां सम्बोधनभयात् पितु:।
विवेश राजभवनं पुन: शोकातुरा तत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
बक्सा पानी में फेंककर वह महल में वापस चली गई, वह बहुत दुःखी थी, उसे डर था कि कहीं उसके पिता जाग न जाएं।
 
Having thrown the box into the water, she went back to the palace, overwhelmed with grief, fearing that her father might wake up.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)