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mahabharat 3.308.22: इस प्रकार बहुत सी बातें कहकर और विलाप करते हुए कुन्ती ने उस पिटारे को अश्वनदी के जल में छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.308.22 
एवं बहुविधं राजन् विलप्य करुणं पृथा।
अवासृजत मञ्जूषामश्वनद्यास्तदा जले॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बहुत सी बातें कहकर और विलाप करते हुए कुन्ती ने उस पिटारे को अश्वनदी के जल में छोड़ दिया।
 
Having said many things in this manner and lamenting pitifully, Kunti then left that box in the waters of the Ashvandi river.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)