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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.308.21 
धन्या द्रक्ष्यन्ति पुत्र त्वां पुनर्यौवनगोचरम्।
हिमवद्वनसम्भूतं सिंहं केसरिणं यथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! वे लोग धन्य हैं जो तुम्हें हिमालय के वनों में जन्मे सिंह के समान युवावस्था में देखेंगे।
 
‘Son! Blessed are those who will see you in your youth, like a lion born in the forests of the Himalayas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)