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mahabharat 3.308.18-19: उस सौभाग्यवती स्त्री ने कौन-सा शुभ स्वप्न देखा होगा कि वह आपके समान दिव्य बालक को, जो सूर्य के समान तेजस्वी है, दिव्य कवच से विभूषित है, दिव्य कुण्डलों से सुशोभित है, कमलदलों के समान विशाल नेत्रों वाला है, लाल कमलदलों के समान गौर वर्ण वाला है, सुन्दर ललाट वाला है और सुन्दर केशों से सुशोभित है, अपना पुत्र बनाएगी?॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.308.18-19 
को नु स्वप्नस्तया दृष्टो या त्वामादित्यवर्चसम्।
दिव्यवर्मसमायुक्तं दिव्यकुण्डलभूषितम्॥ १८॥
पद्मायतविशालाक्षं पद्मताम्रदलोज्ज्वलम्।
सुललाटं सुकेशान्तं पुत्रत्वे कल्पयिष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस सौभाग्यवती स्त्री ने कौन-सा शुभ स्वप्न देखा होगा कि वह आपके समान दिव्य बालक को, जो सूर्य के समान तेजस्वी है, दिव्य कवच से विभूषित है, दिव्य कुण्डलों से सुशोभित है, कमलदलों के समान विशाल नेत्रों वाला है, लाल कमलदलों के समान गौर वर्ण वाला है, सुन्दर ललाट वाला है और सुन्दर केशों से सुशोभित है, अपना पुत्र बनाएगी?॥18-19॥
 
What auspicious dream must that fortunate lady have seen that she would make a divine child like you, who is as radiant as the Sun, adorned with divine armour, adorned with divine earrings, having large eyes like the lotus petals, having fair complexion like the red lotus petals, beautiful forehead and adorned with lovely hair, her son?'॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)