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mahabharat 3.308.17: हे ईश्वर के पुत्र! वह स्त्री धन्य है जो तुम्हें अपने पुत्र के समान पालेगी और जिसका दूध तुम भूख-प्यास के समय पीओगे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.308.17 
धन्या सा प्रमदा या त्वां पुत्रत्वे कल्पयिष्यति।
यस्यास्त्वं तृषित: पुत्र स्तनं पास्यसि देवज॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे ईश्वर के पुत्र! वह स्त्री धन्य है जो तुम्हें अपने पुत्र के समान पालेगी और जिसका दूध तुम भूख-प्यास के समय पीओगे॥17॥
 
O son of God! Blessed is the woman who will raise you as her son and whose breast milk you will drink when you are hungry and thirsty.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)