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mahabharat 3.308.16: पुत्र! तुम्हारे पिता भगवान भुवन भास्कर धन्य हैं, जो अपनी दिव्य दृष्टि से तुम्हें नदी की धारा में स्थित देखेंगे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.308.16 
धन्यस्ते पुत्र जनको देवो भानुर्विभावसु:।
यस्त्वां द्रक्ष्यति दिव्येन चक्षुषा वाहिनीगतम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पुत्र! तुम्हारे पिता भगवान भुवन भास्कर धन्य हैं, जो अपनी दिव्य दृष्टि से तुम्हें नदी की धारा में स्थित देखेंगे॥16॥
 
Son! Blessed is your father Lord Bhuvan Bhaskar, who will see you situated in the river stream with his divine sight.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)