Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.308.14-15: आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, इन्द्र सहित मरुद्गण, दिक्पालों सहित दिशाएँ और समस्त देवता सम-विषम सभी स्थानों में तुम्हारी रक्षा करें। यदि तुम परदेश में भी जीवित होगे, तो भी मैं कवच, कुण्डल आदि इन चिह्नों से तुम्हें पहचान लूँगा॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, इन्द्र सहित मरुद्गण, दिक्पालों सहित दिशाएँ और समस्त देवता सम-विषम सभी स्थानों में तुम्हारी रक्षा करें। यदि तुम परदेश में भी जीवित होगे, तो भी मैं कवच, कुण्डल आदि इन चिह्नों से तुम्हें पहचान लूँगा॥14-15॥
May Aditya, Vasu, Rudra, Sadhya, Vishvedev, Marudgana including Indra, Dishas including Dikpalas and all the gods protect you in all places, even and odd. Even if you are alive in a foreign country, I will recognize you by these signs like armour, earrings etc. 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥