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mahabharat 3.308.13: पुत्र! जिन्होंने तुम्हें मेरे गर्भ में दिव्य भाव से स्थापित किया है, वे तुम्हारे पिता, तपस्वियों में श्रेष्ठ भगवान सूर्य, सर्वत्र तुम्हारा अनुसरण करें॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.308.13 
पिता त्वां पातु सर्वत्र तपनस्तपतां वर:।
येन दत्तोऽसि मे पुत्र दिव्येन विधिना किल॥ १३॥
 
 
अनुवाद
पुत्र! जिन्होंने तुम्हें मेरे गर्भ में दिव्य भाव से स्थापित किया है, वे तुम्हारे पिता, तपस्वियों में श्रेष्ठ भगवान सूर्य, सर्वत्र तुम्हारा अनुसरण करें॥13॥
 
Son! May those who have divinely established you in my womb, may your father, Lord Surya, who is the best among the ascetics, follow you everywhere. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)