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mahabharat 3.308.11: तेरा मार्ग मंगलमय हो। पुत्र! तेरे शत्रु तेरे निकट न आएँ। जो आएँ, उनमें तेरे प्रति विद्रोह की भावना न हो।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 308: कर्णका जन्म, कुन्तीका उसे पिटारीमें रखकर जलमें बहा देना और विलाप करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.308.11 
शिवास्ते सन्तु पन्थानो मा च ते परिपन्थिन:।
आगताश्च तथा पुत्र भवन्त्वद्रोहचेतस:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तेरा मार्ग मंगलमय हो। पुत्र! तेरे शत्रु तेरे निकट न आएँ। जो आएँ, उनमें तेरे प्रति विद्रोह की भावना न हो।॥11॥
 
May your path be auspicious. Son! May your enemies not come near you. Those who come, may they not have any feeling of rebellion against you. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)