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mahabharat 3.307.18: सूर्य ने कहा- भद्रे! तुम्हारा पुत्र महाबाहु होगा, कुण्डल और दिव्य कवच धारण करेगा। उसके कुण्डल और कवच दोनों ही अमृत के समान होंगे। 18॥   |   mahabharat अध्याय 3.307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.307.18 
सूर्य उवाच
भविष्यति महाबाहु: कुण्डली दिव्यवर्मभृत्।
उभयं चामृतमयं तस्य भद्रे भविष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सूर्य ने कहा- भद्रे! तुम्हारा पुत्र महाबाहु होगा, कुण्डल और दिव्य कवच धारण करेगा। उसके कुण्डल और कवच दोनों ही अमृत के समान होंगे। 18॥
 
Surya said- Bhadre! Your son will be strong-armed, wearing earrings and divine armour. Both his earrings and armor will be nectar-like. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)