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mahabharat 3.307.17: कुन्ती बोली - हे समस्त अन्धकार को दूर करने वाले सूर्यदेव! यदि मुझे आपसे पुत्र प्राप्त हो, तो वह महाबली, महान बाहुओं वाला, महान बलवान, कुण्डलों और कवचों से विभूषित शूरवीर हो॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.307.17 
कुन्त्युवाच
यदि पुत्रो मम भवेत् त्वत्त: सर्वतमोनुद।
कुण्डली कवची शूरो महाबाहुर्महाबल:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती बोली - हे समस्त अन्धकार को दूर करने वाले सूर्यदेव! यदि मुझे आपसे पुत्र प्राप्त हो, तो वह महाबली, महान बाहुओं वाला, महान बलवान, कुण्डलों और कवचों से विभूषित शूरवीर हो॥17॥
 
Kunti said – Sun God who removes all darkness! If I get a son from you, then he should be a mighty man with great arms, great strength and a brave man adorned with earrings and armour. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)