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mahabharat 3.307.14: कुन्ती! मेरे साथ सहवास करके तुम कोई पाप नहीं कर रही हो। भला! मैं सांसारिक कामों के वशीभूत होकर पाप का वरण कैसे कर सकता हूँ?॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.307.14 
नाधर्मश्चरित: कश्चित् त्वया भवति भाविनि।
अधर्मं कुत एवाहं वरेयं लोककाम्यया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती! मेरे साथ सहवास करके तुम कोई पाप नहीं कर रही हो। भला! मैं सांसारिक कामों के वशीभूत होकर पाप का वरण कैसे कर सकता हूँ?॥14॥
 
Kunti! You are not committing any sin by having intercourse with me. Well! How can I choose sin under the influence of worldly lust?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)