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mahabharat 3.307.11: दुर्धर्ष देव! क्या मैं आपको समर्पित होकर भी पतिव्रता स्त्री बनी रह सकती हूँ? मनुष्यों का धर्म, यश, कीर्ति और आयु आपमें ही प्रतिष्ठित हैं॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 307: सूर्यद्वारा कुन्तीके उदरमें गर्भस्थापन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.307.11 
आत्मप्रदानं दुधर्ष तव कृत्वा सती त्वहम्।
त्वयि धर्मो यशश्चैव कीर्तिरायुश्च देहिनाम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुर्धर्ष देव! क्या मैं आपको समर्पित होकर भी पतिव्रता स्त्री बनी रह सकती हूँ? मनुष्यों का धर्म, यश, कीर्ति और आयु आपमें ही प्रतिष्ठित हैं॥11॥
 
Durdharsh Dev! Can I remain a chaste woman even after sacrificing myself to you? The religion, fame, glory and longevity of the mortals are established only in you. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)