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mahabharat 3.306.2: उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने मुझे कैसा मन्त्र दिया है? मैं शीघ्र ही (परखकर) उसकी शक्ति जान लूँगा।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.306.2 
अयं वै कीदृशस्तेन मम दत्तो महात्मना।
मन्त्रग्रामो बलं तस्य ज्ञास्ये नातिचिरादिति॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने मुझे कैसा मन्त्र दिया है? मैं शीघ्र ही (परखकर) उसकी शक्ति जान लूँगा।॥2॥
 
What kind of mantra has that great Brahmin given me? I will soon know its power (by testing it).'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)