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mahabharat 3.306.18-19h: मैं तुम्हारे उस मूर्ख पिता को, जो तुम्हारे अन्याय से अनभिज्ञ है, भस्म कर दूँगा और उस ब्राह्मण को भी अच्छी शिक्षा दूँगा, जिसने तुम्हारा चरित्र और सदाचार जाने बिना ही तुम्हें मन्त्र सिखाया है। ॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  3.306.18-19h 
पितरं चैव ते मूढं यो न वेत्ति तवानयम्।
तस्य च ब्राह्मणस्याद्य योऽसौ मन्त्रमदात् तव॥ १८॥
शीलवृत्तमविज्ञाय धास्यामि विनयं परम्।
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हारे उस मूर्ख पिता को, जो तुम्हारे अन्याय से अनभिज्ञ है, भस्म कर दूँगा और उस ब्राह्मण को भी अच्छी शिक्षा दूँगा, जिसने तुम्हारा चरित्र और सदाचार जाने बिना ही तुम्हें मन्त्र सिखाया है। ॥18 1/2॥
 
I will burn your foolish father, who is unaware of your injustice, and I will also teach a good lesson to that Brahmin who has taught you the mantra without knowing your character and good conduct. ॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)