Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.306.16-17: हे सुन्दर मुस्कान वाली सुन्दरी पृथा! मैं तुम्हारे साथ समागम करके लौट जाऊँगा; किन्तु यदि तुम आज मेरे मधुर वचनों का पालन नहीं करोगी, तो मैं क्रोधित होकर तुम्हें, उस मन्त्रदाता ब्राह्मण को तथा तुम्हारे पिता को भी शाप दे दूँगा। तुम्हारे कारण मैं उन सबको भस्म कर दूँगा; इसमें संशय नहीं है। 16-17 | mahabharat अध्याय 3.306: कुन्तीके द्वारा सूर्यदेवताका आवाहन तथा कुन्ती-सूर्य-संवाद । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ गच्छाम्यहं भद्रे त्वया संगम्य सुस्मिते।
यदि त्वं वचनं नाद्य करिष्यसि मम प्रियम्॥ १६॥
शपिष्ये त्वामहं क्रुद्धो ब्राह्मणं पितरं च ते।
त्वत्कृते तान् प्रधक्ष्यामि सर्वानपि न संशय:॥ १७॥
अनुवाद
हे सुन्दर मुस्कान वाली सुन्दरी पृथा! मैं तुम्हारे साथ समागम करके लौट जाऊँगा; किन्तु यदि तुम आज मेरे मधुर वचनों का पालन नहीं करोगी, तो मैं क्रोधित होकर तुम्हें, उस मन्त्रदाता ब्राह्मण को तथा तुम्हारे पिता को भी शाप दे दूँगा। तुम्हारे कारण मैं उन सबको भस्म कर दूँगा; इसमें संशय नहीं है। 16-17
O beautiful Pritha with a beautiful smile! I will return after having intercourse with you; but if you do not obey my sweet words today, then I will be angry and curse you, that Brahmin who gave the mantra and your father as well. Because of you, I will burn them all to ashes; there is no doubt about this. 16-17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥