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वैशम्पायन उवाच
गते तस्मिन् द्विजश्रेष्ठे कस्मिंश्चित् कारणान्तरे।
चिन्तयामास सा कन्या मन्त्रग्रामबलाबलम्॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! उस श्रेष्ठ ब्राह्मण के चले जाने पर किसी कारणवश राजकुमारी कुन्ती ने मन ही मन सोचा कि 'इन मन्त्रों में कोई शक्ति है भी या नहीं?'॥1॥
Vaishmpayana says: Janamejaya! After the departure of that great Brahmin, for some reason the princess Kunti thought to herself; 'Is there any power in this set of mantras or not?॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥