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mahabharat 3.305.9: उसकी विनम्रता, सदाचार और सावधानी से श्रेष्ठ ब्राह्मण संतुष्ट हो गए और उन्होंने कुन्ती की सहायता करने का हर संभव प्रयत्न किया॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.305: कुन्तीकी सेवासे संतुष्ट होकर तपस्वी ब्राह्मणका उसको मन्त्रका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 305: कुन्तीकी सेवासे संतुष्ट होकर तपस्वी ब्राह्मणका उसको मन्त्रका उपदेश देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.305.9 
तस्यास्तु शीलवृत्तेन तुतोष द्विजसत्तम:।
अवधानेन भूयोऽस्या: परं यत्नमथाकरोत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसकी विनम्रता, सदाचार और सावधानी से श्रेष्ठ ब्राह्मण संतुष्ट हो गए और उन्होंने कुन्ती की सहायता करने का हर संभव प्रयत्न किया॥9॥
 
Her modesty, good conduct and caution satisfied the great Brahmins. They made every effort to help Kunti.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)