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mahabharat 3.305.8: राजेन्द्र! उस अनिर्वचनीय कुमारी कन्या कुन्ती ने उस श्रेष्ठ ब्राह्मण की इच्छानुसार सेवा करके उसे अत्यन्त प्रसन्न किया॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.305: कुन्तीकी सेवासे संतुष्ट होकर तपस्वी ब्राह्मणका उसको मन्त्रका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 305: कुन्तीकी सेवासे संतुष्ट होकर तपस्वी ब्राह्मणका उसको मन्त्रका उपदेश देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.305.8 
यथोपजोषं राजेन्द्र द्विजातिप्रवरस्य सा।
प्रीतिमुत्पादयामास कन्यारत्नमनिन्दिता॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! उस अनिर्वचनीय कुमारी कन्या कुन्ती ने उस श्रेष्ठ ब्राह्मण की इच्छानुसार सेवा करके उसे अत्यन्त प्रसन्न किया॥8॥
 
Rajendra! That indescribable virgin girl Kunti made that great Brahmin very happy by serving him as per his wish. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)