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श्लोक 3.305.17  |
यं यं देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि।
तेन तेन वशे भद्रे स्थातव्यं ते भविष्यति॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| हे भद्रे! इस मंत्र से तुम जिस भी देवता का आह्वान करोगे, वह तुम्हारी शरण में आने को विवश हो जाएगा॥17॥ |
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| Bhadre! Whichever deity you invoke with this mantra will be forced to surrender to you.॥ 17॥ |
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