Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.305.15: कुन्ती बोली - हे वेदों में श्रेष्ठ! जब आप और पिता मुझ दासी पर प्रसन्न हुए, तब मेरी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गईं। हे ब्राह्मण! मुझे वर माँगने की आवश्यकता नहीं है। | mahabharat अध्याय 3.305: कुन्तीकी सेवासे संतुष्ट होकर तपस्वी ब्राह्मणका उसको मन्त्रका उपदेश देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्त्युवाच
कृतानि मम सर्वाणि यस्या मे वेदवित्तम।
त्वं प्रसन्न: पिता चैव कृतं विप्र वरैर्मम॥ १५॥
अनुवाद
कुन्ती बोली - हे वेदों में श्रेष्ठ! जब आप और पिता मुझ दासी पर प्रसन्न हुए, तब मेरी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गईं। हे ब्राह्मण! मुझे वर माँगने की आवश्यकता नहीं है।
Kunti said - O best among the scholars of Vedas! When you and father became pleased with me, my maid, then all my desires were fulfilled. O Brahmin! I do not need to ask for a boon. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥