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mahabharat 3.304.4: राजन! हे पुरुषश्रेष्ठ! मुझे बहुत लाभ होगा कि मैं आपकी आज्ञा में रहकर ब्राह्मणों की सेवा करूँ और सदैव आपका हित करूँ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.304.4 
लाभो ममैष राजेन्द्र यद् वै पूजयती द्विजान्।
आदेशे तव तिष्ठन्ती हितं कुर्यां नरोत्तम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजन! हे पुरुषश्रेष्ठ! मुझे बहुत लाभ होगा कि मैं आपकी आज्ञा में रहकर ब्राह्मणों की सेवा करूँ और सदैव आपका हित करूँ॥4॥
 
King! O best of men! It will be of great benefit to me that I remain under your command and serve the Brahmins and always do good to you. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)