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mahabharat 3.304.3: यदि ये पूज्य ब्राह्मण सायंकाल में आएँ, या प्रातःकाल दर्शन दें, अथवा रात्रि में अथवा आधी रात को भी मेरे सामने आएँ, तो भी वे मुझमें कभी क्रोध उत्पन्न नहीं कर सकेंगे - मैं सदैव उनकी उचित सेवा करने के लिए तत्पर रहूँगा ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 3.304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.304.3 
यद्येवैष्यति सायाह्ने यदि प्रातरथो निशि।
यद्यर्धरात्रे भगवान्न मे कोपं करिष्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यदि ये पूज्य ब्राह्मण सायंकाल में आएँ, या प्रातःकाल दर्शन दें, अथवा रात्रि में अथवा आधी रात को भी मेरे सामने आएँ, तो भी वे मुझमें कभी क्रोध उत्पन्न नहीं कर सकेंगे - मैं सदैव उनकी उचित सेवा करने के लिए तत्पर रहूँगा ॥3॥
 
If these worshipful brahmins come in the evening, or visit in the morning, or even appear before me at night or even at midnight, they will never be able to arouse anger in me - I will always be available to render proper service to them. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)