vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या
»
श्लोक 12
श्लोक
3.304.12
राजोवाच
एवमेतत् त्वया भद्रे कर्तव्यमविशङ्कया।
मद्धितार्थं तथाऽऽत्मार्थं कुलार्थं चाप्यनिन्दिते॥ १२॥
अनुवाद
राजा ने कहा - भद्रे! अनिन्दिते! मेरे, तुम्हारे और परिवार के हित के लिए तुम निःसंदेह यह सब करो ॥12॥
The king said – Bhadre! Anindite! For the benefit of me, you and the family, you should do all this without any doubt. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×