श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 304: कुन्तीका पितासे वार्तालाप और ब्राह्मणकी परिचर्या  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.304.12 
राजोवाच
एवमेतत् त्वया भद्रे कर्तव्यमविशङ्कया।
मद्धितार्थं तथाऽऽत्मार्थं कुलार्थं चाप्यनिन्दिते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा - भद्रे! अनिन्दिते! मेरे, तुम्हारे और परिवार के हित के लिए तुम निःसंदेह यह सब करो ॥12॥
 
The king said – Bhadre! Anindite! For the benefit of me, you and the family, you should do all this without any doubt. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)