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mahabharat 3.303.8: मैं अपनी इच्छानुसार जाऊँगा और जब इच्छा होगी तब लौट आऊँगा। हे राजन! मेरे पलंग या आसन पर बैठना पाप होगा। अतः किसी को भी यह पाप नहीं करना चाहिए।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.303.8 
यथाकामं च गच्छेयमागच्छेयं तथैव च।
शय्यासने च मे राजन्नापराध्येत कश्चन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मैं अपनी इच्छानुसार जाऊँगा और जब इच्छा होगी तब लौट आऊँगा। हे राजन! मेरे पलंग या आसन पर बैठना पाप होगा। अतः किसी को भी यह पाप नहीं करना चाहिए।॥8॥
 
‘I will go as per my wish and come back whenever I feel like it. O King! Sitting on my bed or seat would be a crime. So no one should commit this crime.’॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)