Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.303.29: कल्याणी! तुम निष्पाप हो। यदि तुम इस प्रकार उनकी सेवा करने में सफल हो जाओगी, तो अवश्य ही तुम्हारा कल्याण होगा और यदि तुम अपने अनुचित आचरण से इन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को क्रोधित करोगी, तो मेरा सम्पूर्ण कुल जलकर भस्म हो जाएगा। 29॥ | mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं प्राप्स्यसि कल्याणि कल्याणमनघे ध्रुवम्।
कोपिते च द्विजश्रेष्ठे कृत्स्नं दह्येत मे कुलम्॥ २९॥
अनुवाद
कल्याणी! तुम निष्पाप हो। यदि तुम इस प्रकार उनकी सेवा करने में सफल हो जाओगी, तो अवश्य ही तुम्हारा कल्याण होगा और यदि तुम अपने अनुचित आचरण से इन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को क्रोधित करोगी, तो मेरा सम्पूर्ण कुल जलकर भस्म हो जाएगा। 29॥
Kalyani! You are sinless. If you succeed in serving them in this way, you will definitely get welfare, and if you anger these great Brahmins with your inappropriate behavior, then my entire clan will be burnt to ashes. 29॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कुण्डलाहरणपर्वणि पृथोपदेशे त्र्यधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें पृथाको उपदेशविषयक तीन सौ तीनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥