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mahabharat 3.303.26: शुभ! भ्रष्ट कुल में जन्मी स्त्रियाँ किसी विशेष शक्ति के कहने पर विवेकहीन होकर प्रायः भटक जाती हैं (परन्तु मुझे तुम्हारे विषय में ऐसी आशंका नहीं है)।॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.303.26 
दौष्कुलेया विशेषेण कथंचित् प्रग्रहं गता:।
बालभावाद् विकुर्वन्ति प्रायश: प्रमदा: शुभे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
शुभ! भ्रष्ट कुल में जन्मी स्त्रियाँ किसी विशेष शक्ति के कहने पर विवेकहीन होकर प्रायः भटक जाती हैं (परन्तु मुझे तुम्हारे विषय में ऐसी आशंका नहीं है)।॥26॥
 
Shubh! Women born in corrupt families, on being urged by some special force, often go astray due to their lack of discretion (but I don't have such an apprehension in you).॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)