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mahabharat 3.303.23: तुम वृष्णि कुल में उत्पन्न हुई हो। तुम शूरसेन की प्रिय पुत्री हो। पूर्वकाल में जब तुम बाल्यावस्था में थी, तब स्वयं तुम्हारे पिता ने बड़े हर्ष के साथ तुम्हें मुझे सौंप दिया था॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.303.23 
वृष्णीनां च कुले जाता शूरस्य दयिता सुता।
दत्ता प्रीतिमता मह्यं पित्रा बाला पुरा स्वयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तुम वृष्णि कुल में उत्पन्न हुई हो। तुम शूरसेन की प्रिय पुत्री हो। पूर्वकाल में जब तुम बाल्यावस्था में थी, तब स्वयं तुम्हारे पिता ने बड़े हर्ष के साथ तुम्हें मुझे सौंप दिया था॥ 23॥
 
You were born in the Vrishni clan. You are the beloved daughter of Shurasena. In the past, your father himself had handed you over to me with great joy when you were a child.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)