Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.303.22: 'तथापि हे पृथ्वी! तुम अभी भी बच्ची हो और मेरी पुत्री हो, इसलिए मुझे तुम्हें इस क्रोधी ब्राह्मण के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इस विषय में कुछ सलाह देने की आवश्यकता महसूस हो रही है।॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.303.22 
संदेष्टव्यां तु मन्ये त्वां द्विजातिं कोपनं प्रति।
पृथे बालेति कृत्वा वै सुता चासि ममेति च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'तथापि हे पृथ्वी! तुम अभी भी बच्ची हो और मेरी पुत्री हो, इसलिए मुझे तुम्हें इस क्रोधी ब्राह्मण के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इस विषय में कुछ सलाह देने की आवश्यकता महसूस हो रही है।॥ 22॥
 
‘However, O Prithvi, you are still a child and my daughter, so I feel the need to give you some advice on how to behave with this angry brahmin.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)