Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.303.14: पुत्री! तुम्हारे प्रति मेरे विश्वास के कारण ही मैंने इस महापुरुष ब्राह्मण की पूजा स्वीकार की है; अतः मुझे आशा है कि तुम मेरे वचनों को कभी मिथ्या नहीं होने दोगी॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्री! तुम्हारे प्रति मेरे विश्वास के कारण ही मैंने इस महापुरुष ब्राह्मण की पूजा स्वीकार की है; अतः मुझे आशा है कि तुम मेरे वचनों को कभी मिथ्या नहीं होने दोगी॥ 14॥
Daughter! It is because of my trust in you that I have accepted the worship of this illustrious Brahmin; therefore, I hope that you will never let my words be false.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥