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mahabharat 3.303.13: ‘बेटा! यह सौभाग्यशाली ब्राह्मण मेरे घर में रहना चाहता है। मैंने ‘तथास्तु’ कहकर उसे अपने यहाँ ठहराने की प्रतिज्ञा की है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.303.13 
अयं वत्से महाभागो ब्राह्मणो वस्तुमिच्छति।
मम गेहे मया चास्य तथेत्येवं प्रतिश्रुतम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! यह सौभाग्यशाली ब्राह्मण मेरे घर में रहना चाहता है। मैंने ‘तथास्तु’ कहकर उसे अपने यहाँ ठहराने की प्रतिज्ञा की है।॥13॥
 
‘Son! This fortunate Brahmin wishes to stay in my house. I have said ‘Tathastu’ and pledged to accommodate him here.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)