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mahabharat 3.303.11: वह सदैव आपकी सेवा में उपस्थित रहेगी। वह आपको कभी अपमानित नहीं करेगी। मुझे विश्वास है कि आप उसकी विनम्रता और अच्छे आचरण से संतुष्ट होंगे।'   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.303.11 
उपस्थास्यति सा त्वां वै पूजयानवमन्य च।
तस्याश्च शीलवृत्तेन तुष्टिं समुपयास्यसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह सदैव आपकी सेवा में उपस्थित रहेगी। वह आपको कभी अपमानित नहीं करेगी। मुझे विश्वास है कि आप उसकी विनम्रता और अच्छे आचरण से संतुष्ट होंगे।'
 
She will always be present to serve you. You will never be insulted by her. I believe that you will be satisfied with her modesty and good conduct.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)