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mahabharat 3.303.10: ‘महाप्रज्ञ! मेरी पृथा नाम की एक विख्यात पुत्री है, जो शील और सदाचार से युक्त, मुनि है, नियमपूर्वक रहने वाली और विचारवान है। 10॥   |   mahabharat अध्याय 3.303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 303: कुन्तिभोजके यहाँ ब्रह्मर्षि दुर्वासाका आगमन तथा राजाका उनकी सेवाके लिये पृथाको आवश्यक उपदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.303.10 
मम कन्या महाप्राज्ञ पृथा नाम यशस्विनी।
शीलवृत्तान्विता साध्वी नियता चैव भाविनी॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘महाप्रज्ञ! मेरी पृथा नाम की एक विख्यात पुत्री है, जो शील और सदाचार से युक्त, मुनि है, नियमपूर्वक रहने वाली और विचारवान है। 10॥
 
‘Mahapragya! I have a famous daughter named Pritha, who is full of modesty and good conduct, a sage, lives with discipline and is thoughtful. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)