Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.302.6-7h: मैं मौत से उतना नहीं डरता जितना झूठ से। खास तौर पर, जब कोई कुलीन ब्राह्मण मुझसे अपनी जान माँगता है, तो मैं उसे देने से पहले दो बार भी नहीं सोचता। 6 1/2। | mahabharat अध्याय 3.302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बिभेमि न तथा मृत्योर्यथा बिभ्येऽनृतादहम्।
विशेषेण द्विजातीनां सर्वेषां सर्वदा सताम्॥ ६॥
प्रदाने जीवितस्यापि न मेऽत्रास्ति विचारणा।
अनुवाद
मैं मौत से उतना नहीं डरता जितना झूठ से। खास तौर पर, जब कोई कुलीन ब्राह्मण मुझसे अपनी जान माँगता है, तो मैं उसे देने से पहले दो बार भी नहीं सोचता। 6 1/2।
I am not as afraid of death as I am of lies. In particular, I cannot even think twice before giving my life to all the noble Brahmins when they ask for it. 6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥