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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय
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श्लोक 20
श्लोक
3.302.20
तच्छ्रुत्वा भगवान् देवो भानु: स्वर्भानुसूदन:।
उवाच तं तथेत्येव कर्णं सूर्य: स्मयन्निव॥ २०॥
अनुवाद
यह सब सुनकर राहुका का नाश करने वाले सूर्यदेव ने मुस्कुराते हुए कर्ण से कहा, “तुमने जो कुछ देखा है, वह सही है।”
On hearing all this, the Sun God, the destroyer of Rahuka, said to Karna smilingly, “Whatever you have seen is correct.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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