श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय  »  श्लोक 18h
 
 
श्लोक  3.302.18h 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा सहस्रांशु: सहसान्तरधीयत।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! ऐसा कहकर सूर्यदेव वहाँ से सहसा अन्तर्धान हो गये।'
 
Vaishmpayana says - 'O Janamejaya! Having said this the Sun God suddenly disappeared from there. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)