Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.302.12-13: कान! यदि तुम इन दोनों कुण्डलों से सुसज्जित होगे, तो समस्त प्राणियों के लिए अविनाशी रहोगे। बालक! दैत्य इन्द्र युद्ध में अर्जुन के द्वारा तुम्हारा विनाश चाहते हैं। इसीलिए वे तुम्हारे दोनों कुण्डलों को छीन लेना चाहते हैं। 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 3.302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.302.12-13 
अवध्यो ह्यसि भूतानां कुण्डलाभ्यां समन्वित:॥ १२॥
अर्जुनेन विनाशं हि तव दानवसूदन:।
प्रार्थयानो रणे वत्स कुण्डले ते जिहीर्षति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कान! यदि तुम इन दोनों कुण्डलों से सुसज्जित होगे, तो समस्त प्राणियों के लिए अविनाशी रहोगे। बालक! दैत्य इन्द्र युद्ध में अर्जुन के द्वारा तुम्हारा विनाश चाहते हैं। इसीलिए वे तुम्हारे दोनों कुण्डलों को छीन लेना चाहते हैं। 12-13॥
 
Ear! If you are equipped with these two earrings, you will remain indestructible to all living beings. Child! Demon Indra wants your destruction through Arjun in the war. That is why they wish to take away both your earrings. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)