Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.302.11-12h: सूर्य बोले - पिताश्री! यदि आप ये दोनों सुन्दर कुण्डल इन्द्र को दे रहे हैं, तो आपको अपनी विजय के लिए महाबली इन्द्र से कोई अस्त्र भी मांग लेना चाहिए और उनसे स्पष्ट कह देना चाहिए कि देवराज! मैं आपको ये दोनों कुण्डल एक शर्त पर दे सकता हूँ।॥11 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.302: सूर्य-कर्ण-संवाद, सूर्यकी आज्ञाके अनुसार कर्णका इन्द्रसे शक्ति लेकर ही उन्हें कुण्डल और कवच देनेका निश्चय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूर्य उवाच
यदि तात ददास्येते वज्रिणे कुण्डले शुभे।
त्वमप्येनमथो ब्रूया विजयार्थं महाबलम्॥ ११॥
नियमेन प्रदद्यां ते कुण्डले वै शतक्रतो।
अनुवाद
सूर्य बोले - पिताश्री! यदि आप ये दोनों सुन्दर कुण्डल इन्द्र को दे रहे हैं, तो आपको अपनी विजय के लिए महाबली इन्द्र से कोई अस्त्र भी मांग लेना चाहिए और उनसे स्पष्ट कह देना चाहिए कि देवराज! मैं आपको ये दोनों कुण्डल एक शर्त पर दे सकता हूँ।॥11 1/2॥
Surya said - Father! If you are giving these two beautiful earrings to Indra, then you should also ask for a weapon from the mighty Indra for your victory and tell him clearly that Devraj! I can give you these two earrings with one condition. ॥ 11 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥