Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.301.8: मुझे अपने भक्तों की रक्षा करनी है, इसीलिए मैं तुम्हारे हित के लिए तुमसे कुछ कह रहा हूँ। हे महारथी! वह मेरा भक्त है, वह अत्यंत भक्तिभाव से मेरा पूजन करता है, ऐसा सोचकर मेरा तुम्हारे प्रति स्नेह उत्पन्न हो गया है। अतः तुम्हें मेरी आज्ञा का पालन करना चाहिए। ॥8॥ | mahabharat अध्याय 3.301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भक्तिमन्तो हि मे रक्ष्या इत्येतेनापि हेतुना।
भक्तोऽयं परया भक्त्या मामित्येव महाभुज।
ममापि भक्तिरुत्पन्ना स त्वं कुरु वचो मम॥ ८॥
अनुवाद
मुझे अपने भक्तों की रक्षा करनी है, इसीलिए मैं तुम्हारे हित के लिए तुमसे कुछ कह रहा हूँ। हे महारथी! वह मेरा भक्त है, वह अत्यंत भक्तिभाव से मेरा पूजन करता है, ऐसा सोचकर मेरा तुम्हारे प्रति स्नेह उत्पन्न हो गया है। अतः तुम्हें मेरी आज्ञा का पालन करना चाहिए। ॥8॥
I must protect my devotees, that is why I am telling you something for your benefit. O great warrior! He is my devotee, he worships me with utmost devotion, thinking this, I have developed affection for you. Therefore, you must obey my orders. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥