Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.301.7: मरे हुए मनुष्य का यश मुर्दे के गले में पड़ी माला के समान व्यर्थ है। तुम मेरे भक्त हो, इसलिए मैं तुम्हारे कल्याण के लिए ये सब बातें कह रहा हूँ ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.301.7 
मृतस्य कीर्तिर्मर्त्यस्य यथा माला गतायुष:।
अहं तु त्वां ब्रवीम्येतद् भक्तोऽसीति हितेप्सया॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मरे हुए मनुष्य का यश मुर्दे के गले में पड़ी माला के समान व्यर्थ है। तुम मेरे भक्त हो, इसलिए मैं तुम्हारे कल्याण के लिए ये सब बातें कह रहा हूँ ॥7॥
 
The fame of a dead person is as worthless as a garland around the neck of a corpse. You are my devotee, therefore I am saying all these things for your welfare. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)