Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.301.14: हे भोले! तुम बार-बार युक्तियुक्त वचन बोलकर और अनेक प्रकार की बातों से उसे मोहित करके देवराज इन्द्र की कुण्डल लेने की इच्छा को नष्ट कर सकते हो॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.301.14 
शक्या बहुविधैर्वाक्यै: कुण्डलेप्सा त्वयानघ।
विहन्तुं देवराजस्य हेतुयुक्तै: पुन: पुन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे भोले! तुम बार-बार युक्तियुक्त वचन बोलकर और अनेक प्रकार की बातों से उसे मोहित करके देवराज इन्द्र की कुण्डल लेने की इच्छा को नष्ट कर सकते हो॥14॥
 
O innocent one! By repeatedly speaking sensible words and luring him with many kinds of talks you can destroy the desire of Devraja Indra to take the earrings. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)