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mahabharat 3.301.12: महाद्युते! इन दो सुन्दर कुण्डलों से तुम निर्मल आकाश में विशाखा नामक दो नक्षत्रों के बीच चमकते हुए चन्द्रमा के समान शोभा पा रहे हो॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.301.12 
शोभसे कुण्डलाभ्यां च रुचिराभ्यां महाद्युते।
विशाखयोर्मध्यगत: शशीव विमले दिवि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाद्युते! इन दो सुन्दर कुण्डलों से तुम निर्मल आकाश में विशाखा नामक दो नक्षत्रों के बीच चमकते हुए चन्द्रमा के समान शोभा पा रहे हो॥12॥
 
Mahadyute! With these two beautiful earrings, you look beautiful like the moon shining between the two constellations named Vishakha in the clear sky. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)