Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.301.11: राधानन्दन! जो बात मैं पहले कह चुका हूँ, उसे मैं दोहरा रहा हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनो - 'यदि इन्द्र भी उन्हें माँगे, तो भी तुम उसे अपने कुण्डल मत देना।' ॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुनरुक्तं च वक्ष्यामि त्वं राधेय निबोध तत्।
मास्मै ते कुण्डले दद्या भिक्षिते वज्रपाणिना॥ ११॥
अनुवाद
राधानन्दन! जो बात मैं पहले कह चुका हूँ, उसे मैं दोहरा रहा हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनो - 'यदि इन्द्र भी उन्हें माँगे, तो भी तुम उसे अपने कुण्डल मत देना।' ॥11॥
Radhanandan! I am repeating what I have said earlier, listen to it carefully - 'Even if Indra asks for them, do not give him your earrings.' ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥