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mahabharat 3.301.1: सूर्य ने कहा- कर्ण! तुम स्वयं को, अपने मित्रों को, अपने पुत्रों को, अपनी पत्नियों को तथा अपने माता-पिता को हानि न पहुँचाओ। 1॥   |   mahabharat अध्याय 3.301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 301: सूर्यका कर्णको समझाते हुए उसे इन्द्रको कुण्डल न देनेका आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.301.1 
सूर्य उवाच
माहितं कर्ण कार्षीस्त्वमात्मन: सुहृदां तथा।
पुत्राणामथ भार्याणामथो मातुरथो पितु:॥ १॥
 
 
अनुवाद
सूर्य ने कहा- कर्ण! तुम स्वयं को, अपने मित्रों को, अपने पुत्रों को, अपनी पत्नियों को तथा अपने माता-पिता को हानि न पहुँचाओ। 1॥
 
Surya said- Karna! Do not harm yourself, your friends, sons, wives and parents. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)