Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.300.9: उस समय उन्होंने वेदों को जानने वाले ब्राह्मण का रूप धारण किया था। उनका रूप योग-सम्पन्न था। उन्होंने कर्ण को उसके हित के लिए समझाया और यह कहा-॥9॥ | mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय उन्होंने वेदों को जानने वाले ब्राह्मण का रूप धारण किया था। उनका रूप योग-सम्पन्न था। उन्होंने कर्ण को उसके हित के लिए समझाया और यह कहा-॥9॥
At that time he had assumed the form of a Brahmin who knew Vedas. His form was full of yoga-richness. He explained to Karna for his benefit and said this -॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥