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mahabharat 3.300.7: ब्राह्मणभक्त और सत्यवादी वीर कर्ण सुन्दर बिछौने वाले बहुमूल्य पलंग पर अत्यन्त शान्तिपूर्वक सो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.300.7 
महार्हे शयने वीरं स्पर्द्धॺास्तरणसंवृते।
शयानमतिविश्वस्तं ब्रह्मण्यं सत्यवादिनम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणभक्त और सत्यवादी वीर कर्ण सुन्दर बिछौने वाले बहुमूल्य पलंग पर अत्यन्त शान्तिपूर्वक सो रहा था।
 
The brave Karna, a devotee of Brahmins and a truthful person, was sleeping very peacefully on a costly bed with beautiful bedding. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)